अंततः मनसे और शिवसेना की अलगाव वादी मानसिकता का विरोध करने वाला कोई तो मिला ,नहीं तो ऐसा लग रहा था कि महाराष्ट्र के वो अघोषित शासक है और सभी उनकी जी हजूरी करने में लगे हुए हैं । यहाँ तक कि कांग्रेस भी उनकी अलगाववादी नीतियों को ही पोषित करने में लगी हुई थी और ऐसा लग रहा था कि महाराष्ट्र भी जल्दी ही दुसरे जम्मू कश्मीर में तब्दील हो जाएगा .राजनीति के लिए ही सही ,कम से कम आर .एस .एस .ने उनका विरोध तो किया ,भले ही वोह गड्करीजी को उत्तरभारत कि राजनीति में स्थापित करने के लिए है।
No comments:
Post a Comment